किसकी लाठी, किसके लठैत?

मीडिया अब पेशेवर लठैत बन गया है। वह सूचना देने, शिक्षित करने या मनोरंजन प्रदान करने के बजाय लट्ठ...
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काला धन, काला मीडिया

मीडिया की आँखों पर काला परदा पड़ा हुआ है। वह ठीक से नहीं देख पा रहा-न खुद को न किसी और को। इसीलि...
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जब सरकार मुक़ाबिल हो...

तमाम सरकारें अपने विरोधियों की बाहें मरोड़ती हैं, उन्हें धमकाती हैं, खरीदने की कोशिश करती हैं और...
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