अब स्टूडेंट्स से ही होप की जा सकती है-दीपिका

अब स्टूडेंट्स से ही होप की जा सकती है-दीपिका - दीपिका पादुकोण के जेएनयू विजिट के बाद से ही मैं उनका इंटरव्यू करने की कोशिश कर रहा था मगर उनका पीए किसी भी तरह से राज़ी ही नहीं हो रहा था।
उसे लग रहा था कि मैडम कुछ बोल देंगीं और लोग छपाक के ख़िलाफ़ हंगामा खड़ा कर देंगे। अंत में मैंने धमकी से काम लिया। कहा कि मैं अभी उनका फ़ेक इंटरव्यू पब्लिश कर दूँगा तब करते रहना खंडन।
अब स्टूडेंट्स से ही होप की जा सकती है-दीपिका

धमकी का उस पर थोड़ा असर हुआ। उसने कहा कि वह मुझे मैडम से मिलवा देगा मगर ये मैडम पर है अगर वो बात करना चाहती है या नहीं। मैने कहा ठीक है। उसने मुझे सुबह स्टूडियो में ही बुला लिया। 
जब मैं स्टूडियो पहुँचा तो शूटिग की तैयारी चल रही थी। शायद शॉट में अभी थोड़ी देर थी इसलिए वे रिलैक्स मूड में थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि मेरा प्रोड्यूसर बोल रहा है कि अभी पंगा नहीं लेने का।
छपाक का बिजनेस के लिए जितना प्रोमोशन के लिए कट्रोवर्सी चाहिए था हो गया। अभी चुप बैठो। मैंने उनको समझाया कि अभी पूरा देश आपको सुनना चाहता है।
अगर आप चुप रहेंगी तो लोग यही समझेंगे कि आपने अपनी फिल्म के प्रोमोशन के लिए ड्रामा किया था। दीपिका कुछ पल सोचती रहीं फिर बोलीं ठीक है.......जब मै सच्चे मन से उधर गई थी तो फिर क्यों डरूँ। आप पूछिए जो पूछना चाहते हैं। 
सबसे पहले तो ये बताइए कि आपको ये अचानक क्यों सूझा कि आपको जेएनयू जाना चाहिए? आप पहले कभी इस तरह के प्रोटेस्ट में नहीं गईं, फिर अचानक जेएनयू?
ये सही है कि मैं एक्टिविस्ट नहीं हूँ, मगर जब मैंने जेएनयू का वीडियो देखा तो मैं अंदर तक हिल गई। मुझे लगा कि ये तो हद हो गई। इंडिया के कैपिटल में इतने प्रेस्टिजियस इंस्टीट्यूशन में इस तरह से गुंडे घुसकर स्टूडेंट्स को मार सकता है ये मेरे इमेजिनेशन के भी बाहर था। मुझे बहुत गुस्सा आ गया था। मेरा प्रोड्यूसर, डायरेक्टर सब लोग मुझे रोका मगर मैंने डिसाइड कर लिया था कि मैं जाऊँगी, इसलिए चली गई। 
लेकिन बहुत से लोगों को लगता है कि आपकी फिल्म रिलीज़ हो रही थी इसलिए आपने इसे प्रोमोशन का इवेंट बना लिया। कई चैनलों के ऐंकर तो आपके पीछे ही पड़ गए थे।
ऐंकरों को छोड़िए, उन्हें तो बस मसाला चाहिए। बात का बतंगड़ बनाना और उसे तोड़ने-मरोड़ने में उन्हें महारत हासिल है। लेकिन सच ये है कि मैं जेनुइनली फील कर रही थी इसलिए गई थी। लोगों को ऐसा इसलिए लग रहा है क्योंकि इंडस्ट्री के बहुत से लोग ऐसा करते रहे हैं। लेकिन मैं उनसे कहूँगी कि बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो दिल से करतें हैं, बॉक्स ऑफिस या इमेज बिल्डिंग के लिए नहीं करता। जावेद जी, शबाना जी, स्वरा भास्कर, अनुराग कश्यप....कितने नाम गिनाऊँ। 

अच्छा ये बताइए कि आपको डर नहीं लगा कि आप जेएनयू के छात्रों का समर्थन करेंगी तो सरकार नाराज़ हो जाएगी?
डर लगता था इसलिए तो पहले कभी कहीं गई नहीं। लेकिन इस बार लगा कि जाना चाहिए। अब सरकार को जो करना हो करे मैं नहीं डरती। हाँ मैं उससे रिक्वेस्ट करूँगी कि वह डिवाइड एंड रूल वाली चाल चलना बंद करे। इससे देश का बहुत नुकसान हो रहा है। 
आपको नहीं लगता कि मोदी-शाह प्रोड्यूसरों से कहकर आपको काम दिलवाना बंद करवा देंगे?
देखिए मैं तो पॉलिटिक्स में हूँ नहीं, इसलिए मुझे टारगेट करने का बनता नहीं है। फिर भी अगर टारगेट करेंगे तो देखा जाएगा। मैं हॉलीवुड शिफ्ट कर जाऊँगी, वहाँ मेरा क्या कर लेगें। 
लेकिन इंडस्ट्री के तमाम लोग तो डरे हुए हैं? कुछ ही लोग सामने आ रहे है। बहुत से लोग तो सरकार के समर्थन में खड़े हैं?
मैं दूसरों से यही कह सकती हूँ कि उनको भी सामने आना चाहिए। उनको भी ग़लत चीज़ों का विरोध करना चाहिए। अगर ये देश हमारा है तो हमको इसे बचाना भी पड़ेगा। बाक़ी किसी को फोर्स तो नहीं कर सकती न।


लोग कह रहे हैं कि बड़े-बड़े स्टार चुप हैं। अमिताभ बच्चन कुछ नहीं बोल रहे, शाहरुख़ सलमान नहीं बोल रहे। बहुत सारी एक्ट्रेस भी नहीं बोल रहीं?
उनके बारे में तो आपको उनसे ही पूछना होगा। मैं तो इतना कह सकती हूँ कि जिसके पास भी रीढ़ का हड्डी होगा और जो भी देश से प्यार करता होगा वो बोलेगा, चुप नहीं रहेगा। 
ये बताइए कि आप केवल जेएनयू के वायलेंस से दुखी हैं या सिटिज़नशिप एक्ट और एनआरसी को लेकर जो प्रोटेस्ट चल रहे है उनसे भी एसोसिएट करती हैं खुद को?
मैं सीएए और एनआरसी दोनों को ग़लत मानती हूँ और उनका विरोध करती हूँ। ये दोनों कानून ग़लत हैं और सरकार को इन्हें वापस लेना चाहिए। मैं तो मॉब लिंचिंग और मोदीजी की डिवाइड एंड रूल पॉलिसी से भी दुखी हूँ। मैं मोदीजी से अपील करती हूँ कि वे देश को एक करें, बाँटें न। 
तो क्या आप कभी प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने भी कभी जाएंगी?
अभी मैंने डिसाइड नहीं किया है, मगर मैं जा भी सकती हूँ। दरअसल, मैं जाना चाहती हूँ मगर मैं नहीं चाहती कि मेरी वजह से प्रोड्यूसर्स को प्राब्लम हो इसलिए अभी थोड़ा सोचना पड़ रहा है कि जाऊँ या नहीं जाऊँ। बट आई सपोर्ट दिस मूवमेंट विद बॉटम ऑफ माई हार्ट। अब तो स्टूडेंट्स से ही होप है। मै तो कन्हैया कुमार की फैन हूँ। वह बहुत अच्छे से लीड कर रहा है। 



इतने में आवाज़ आई-मैडम शॉट रेडी है। 
दीपिका ने खड़े होते हुए कहा-आई होप चैनलों की तरह आप मेरी बातों को तोड़ेंगे-मरोड़ेंगे नहीं और वही पब्लिश करेंगे जो मैंने कहा है। 
मैने उन्हें यक़ीन दिलाया और थैंक्स कहकर चला आया।

Written By
Prof.(Dr.) Mukesh Kumar [Sr. Journalist, TV anchor, Writer]
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