डॉ. मुकेश कुमार की कविता - झूठ झूठ महाझूठ

डॉ. मुकेश कुमार की कविता - झूठ झूठ महाझूठ

डॉ. मुकेश की कविता झूठ झूठ महाझूठ मौजूदा समय को सटीक ढंग से प्रस्तुत करती है। 

हम जिसे पोस्ट ट्रुथ एरा कहते हैं वह इस कविता में बखूबी प्रतिबिंबित होता है, ये और बात है कि ये कविता करीब बारह तेरह साल पहले लिखी गई थी जब पोस्ट ट्रुथ की कहीं कोई चर्चा नहीं थी।

डॉ. मुकेश कुमार की कविता - झूठ झूठ महाझूठ


हम हब जानते हैं कि हम ढेर झूठों और फ़ेक न्यूज़ के बीच में रह रहे हैं और ट्रम्प तथा मोदी जैसे नेताओं ने अपने नए नए झूठों से सच को कहीं नीचे दबा दिया है।



ये कविता उन्हीं झूठों के बीच गुम हो गए सच की याद दिलाती है। डॉक्टर मुकेश कुमार जाने माने टीवी पत्रकार, लेखक, एकेडिमीशियन एवं कवि हैं। 

उन्होंने कई न्यूज़ चैनल शुरू किए हैं और बतौर ऐंकर हज़ारों टीवी कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं। उनकी एक पहचान कवि के तौर पर भी है। 

उनका पहला कविता संग्रह साधो, जग बौराना काफी लोकप्रिय हुआ था और जल्द ही दूसरा कविता संग्रह प्रकाशित होने वाला है। वैसे विभिन्न विषयों पर उनकी एक दर्ज़न किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।
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