काँग्रेस अब खाट-दर्शन पर चलेगी और उसका चुनाव चिन्ह होगा खटिया-ग़ुलाम नबी


काँग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव के प्रभारी ग़ुलाम नबी आज़ाद उस समय राहुल गाँधी के साथ खटिया पर बैठकर अगली खाट सभा की योजना बना रहे थे। पास ही एक दूसरी खाट पर बैठे प्रशांत किशोर लैपटाप पर खटिया की भाँति-भाँति के डिज़ायन दिखा रहे थे और बीच-बीच में विशेषज्ञों की तरह राय भी दे रहे थे। उन्होंने खटिया की छाप वाले गमछे, टोपियाँ, बिल्ले आदि के डिज़ायन भी मँगवा रखे थे जो कि उनके पास खाट पर ही रखे हुए थे।

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मैं दूर एक खाट पर बैठकर उनके फ़ारिग होने का इंतज़ार करने लगा। हर तरफ खाट ही खाट देखकर मुझे न्यूज़ चैनलों के लिए एक अच्छा सा शीर्षक सूझने लगा- मेरी, तेरी, उसकी खाट। वैसे फिल्मी तर्ज़ पर चलने वाले चैनल –सरकाए लो खटिया भाड़ा लगे या खटिया खड़ी, परेशानी बढ़ी, ज़्यादा पसंद करते।



मेरा खटिया चिंतन और परवान चढ़ता इसके पहले ही गाँधी टोपी से लैस एक व्यक्ति ने आकर मुझे बताया कि आज़ाद साहब आपका इंतज़ार कर रहे हैं। मुझे थोड़ा अटपटा लगा, क्योंकि इंतज़ार तो मैं कर रहा था, फिर आज़ाद ये दावा कैसे कर सकते हैं। ख़ैर मन ही मन समरथ को नहीं दोष गोंसाईं बड़बड़ाते हुए मैंने अपने इस अटपटेपन को वहीं झटका और चल दिया उनका एनकाउंटर करने।

आज़ाद साहब ने खटिया में जगह बनाते हुए मुझे बैठने के लिए कहा। हालाँकि मुझे शक़ था कि काँग्रेस की खटिया दो लोगों का वज़न सह पाएगी, मगर खटिया काफ़ी मज़बूत थी। मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि या तो खटिया निर्माता को अच्छे से भुगतान किया गया होगा या फिर कमीशनखोरी कम हुई होगी। खैर मुझे तो बैठने से मतलब था, खाट के पाए गिनने से नहीं, इसलिए मैं बेतकल्लुफ़ होकर काबिज़ हो गया।

लस्सी का ग्लास खाली करने के बाद सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू हुआ।


आज़ाद साहब, आपकी पहली खाट सभा में जो कुछ हुआ उसने काँग्रेस को ही मजाक में तब्दील कर दिया। आपकी खटिया लुट चुकी है और आप लोग फिर भी खाट लेकर घूम रहे हैं?
अव्वल तो ये मुकेश जी कि लोग काँग्रेस का नहीं किसानों का मज़ाक उड़ा रहे हैं, जो कि उचित नहीं है। किसान हमारे अन्नदाता हैं और उनका उपहास करना बीजेपी को भारी पड़ेगा। और वे अगर कुछ खाट ले गए हैं तो उन्हें चोर कहना तो और भी ग़लत है। चोर कहना है तो अंबानी, अडानी को कहिए, जिन्होंने हज़ारों करोड़ का नुकसान देश का किया है। माल्या तो नौ हज़ार करोड़ लेकर भाग गया है और हम उसे डिफॉल्टर कह रहे हैं, जबकि वह तो लुटेरा है। ये पूर्वाग्रह ठीक नहीं, इससे किसान बुरी तरह नाराज़ हैं। वे कह रहे हैं जो लोग पूरे देश को लूट रहे हैं उन्हें लुटेरे कहने के बजाय भोले-भाले किसानों पर इस तरह का इल्ज़ाम लगाना बहुत ग़लत है।

आपने तो राहुल की लाइन पकड़ ली?
काँग्रेस में जो लाइन नेहरू-गाँधी फेमिली की होती है, वही सबकी। इसलिए ये तो लाज़िमी है कि मैं राहुल जी को फालो करूँ। लेकिन ये लाइन भर नहीं है। ये पूरी विचारधारा है, दर्शन है। काफ़ी चिंतन-मनन के बाद हम इस खटिया दर्शन पर पहुँचे हैं।

खटिया दर्शन?
जी हां, खटिया दर्शन। आप हँसिए मत। हमने भारतीय परंपरा और परिस्थितियां का गहराई से अध्ययन करके इसे आकार दिया है। आप जब इसका सही ढंग से अध्ययन करेंगे तब आपको समझ में आएगा कि ये कोई मज़ाक की चीज़ नहीं है।

चलिए मैं सीरियस हो जाता हूँ। अब बताइए कि खटिया दर्शन के बारे में?
देखिए खटिया हमारा लोकतंत्र है। इसके चार पाए स्वतंत्रता, समता, न्याय और धर्मनिरपेक्षता को प्रतिबिंबित करते हैं।

वाह, आपने तो कमाल का रूपक गढ़ा है। चार पाए यानी चार खंभे। तब तो आपने ये भी ज़रूर सोचा होगा-न्यायपालिका, विधानपालिका, कार्यपालिका और मीडिया? 
हाँ, अब आपने सही पकड़ा है। बहरहाल, अब इसके चारों पाटों पर ग़ौर कीजिए (बाकायदा खाट के पाटों को दिखाते हुए)। ये पाट किसान, मज़दूर, बुद्धिजीवी और नेता हैं। इन्होंने चारों पायों को जोड़ा भी है और उसे सँभालकर भी रखा हुआ है।

वाह क्या बात है। इतनी दूर तक तो किसी ने सोचा भी नहीं होगा? 
(खुश होते हुए) इसके आगे सुनिए। ये जो रस्सियाँ हैं न ये हमारे हिंदुस्तानी समाज का ताना-बाना हैं। जितने भी जाति, संप्रदाय हैं वे यही रस्सियां हैं जो एक-दूसरे से गुँथी हुई हैं। ये जितनी पक्की होंगी और मज़बूती से आपस में गुँथी होंगी उतना ही हमारा देश मज़बूत होगा और आगे बढ़ेगा।

लेकिन आज़ाद साहब आप यहां खटिया दर्शन बघार रहे हैं और उधर विपक्षी दल आपकी खाट सभाओं का मज़ाक उड़ा रहे हैं?
वे इसके सिवा कर भी क्या सकते हैं। उन्हें हिंदुस्तान की समझ नहीं है, वे देश को जानते ही नहीं हैं। बापू ने कहा था कि भारत गाँवों का देश है। दरअसल वे कहना चाहते थे कि गाँव का मतलब ही खाट है, क्योंकि आम तौर पर गोंवों में ही खाटों का इस्तेमाल होता है। शहरों मे तो अब पलंग या बेड वगैरा चलते हैं। हमारा मानना है कि खाट जितनी मज़बूत होंगी, गाँव उतने ही शक्तिशाली होंगे और अगर गाँव शक्तिशाली हुए तो देश भी सशक्त होगा।

तब तो आपको अपने दर्शन में खाट स्वराज की अवधारणा भी रखनी चाहिए?   
रखनी चाहिए नहीं, रखी हुई है। हम मानते हैं कि जब तक हर घर में हर व्यक्ति के पास सोने के लिए अपनी खाट नहीं होगी, तब तक गाँव तरक्की नहीं करेंगे और जब तक गाँव...

तरक्की नहीं करेंगे, देश तरक्की नहीं करेगा.......
करेक्ट। अब देखिए आदमी की उत्पादकता तभी अच्छी हो सकती है जब वह अच्छी नींद ले। अच्छी नींद तभी हो सकती है जब उसके पास अच्छी खाट हो। अच्छी खाट...

तभी हो सकती है जब उसके पास उसे खरीदने के लिए पैसे हों......
हाँ, इसलिए हमने अपने घोषणापत्र में कहा है कि हम खाट खरीदने के लिए सब्सिडी देंगे।

तब तो खाट सभा में खटिया-लूट भी आपकी योजना के अनुरूप ही होगी?
जी हाँ, बिल्कुल। हम तो चाहते हैं कि सभा की समाप्ति के बाद लोग खटिया ले जाएं। वे जब-जब खटिया में सोएंगे उन्हें काँग्रेस और राहुल गाँधी के सपने आएंगे और वे उनके मुरीद बनते जाएंगे।

आपका मज़ाक उड़ाने वाले तो इतनी दूर तक सोच ही नहीं पा रहे?
कैसे सोचेंगे? दूर की सोच के लिए अक्ल चाहिए जो राहुल जी में कूट-कूटकर भरी है।

प्रशांत किशोर में नहीं?
उनमें भी है, मगर राहुल जी से उनका क्या मुक़ाबला। आखिर पीके को लाने वाले भी तो वही हैं। 

हाँ, ये तो है। उनका ये बयान तो बहुत प्रभावशाली रहा कि खाट ले जाने वाले ग्रामीणों को चोर कह रहे हैं और वो जो 9000 करोड़ लूटकर चले जाने वाले को डिफॉल्टर? 
अरे उनका तो जवाब नहीं। एक ही बयान से सबको धराशायी कर दिया। सबकी बोलती बंद कर दी।

अच्छा अब ये बताइए कि यूपी चुनाव में आपका एजेंडा क्या है?
एजेंडा बिल्कुल साफ़ है। हिंदुस्तानी खाट को सांप्रदायिकता का घुन लग गया है। ये घुन संघ और बीजेपी हैं। सत्ताईस साल से इस प्रदेश में वे यही कर रहे हैं। उसके लोग खाट की रस्सियों को नए-नए बहाने तलाशकर काट रहे हैं। इस सबसे खाट कमज़ोर हो रही है। हमारा वादा है कि हम यूपी को इस घुन से मुक्त करवाकर उसे नई खाट में तब्दील कर देंगे, मेरा मतलब है कि उसे विकास के रास्ते पर ले जाएंगे।

जब आप पार्टी की विचारधारा, दर्शन और रणनीति सब कुछ बदल रहे हैं तो उसका हुलिया भी बदल डालिए?
देखिए आपको ग़लतफ़हमी हो रही है। हमने कुछ बदला नहीं है, बल्कि पुराने को नए समय के हिसाब से अपडेट किया है। लेकिन जैसा कि आपने कहा हम समय के हिसाब से उसके हुलिया को भी बदल रहे हैं। हमने तय किया है कि अब पार्टी का चुनाव चिन्ह खटिया होगा। इसके लिए हमने चुनाव आयोग को अर्ज़ी दे दी है। उम्मीद है कि जल्दी ही उसकी मंज़ूरी मिल जाएगी। तब तक हम चाहते हैं कि खाट यात्रा के ज़रिए लोगों के दिल-ओ-दिमाग़ पर खटिया अच्छे से बैठ जाए, ताकि जब वे वोट डालने जाएं तो उनके मन में किसी तरह का कोई भ्रम न रहे।



ग्रेट। ऐसा दिखलाई दे रहा है कि आप लोगों ने पूरी तैयारी कर ली है और राहुल जी के नेतृत्व में पार्टी नया रूप ले रही है और आप जैसे वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन में वह पहले जैसी लोकप्रिय होगी। अब फटाफट राहुल जी को अध्यक्ष भी बनवा दीजिए, बहुत दिनों से टल रहा है?
हाँ, हाँ बिल्कुल। यूपी चुनाव जीतने के तुरंत बाद यही तो करना है।

मैंने देखा कि ग़ुलाम नबी साहब के चेहरे पर नया नूर आ गया है। ऐसा लगा मानो अब वे काँग्रेस की बदलती हुई तक़दीर दिखलाई दे रही हो। मैंने उन्हें इस सुख से वंचित करना उचित नहीं समझा और खटिया पर पड़ा अपना बैग उठाकर चला आया।

वैधानिक चेतावनी - ये व्यंग्यात्मक शैली में लिखा गया काल्पनिक इंटरव्यू है। कृपया इसे इसी नज़रिए से पढ़ें।



Written by-डॉ. मुकेश कुमार







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