हल्ला मचेगा तो फिर से सर्जिकल स्ट्राइक करवा देंगे-पर्रिकर


रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को आजकल साँस लेने की भी फुरसत नहीं है। एकदम से उनका काम बढ़ गया है। इतना बढ़ गया है कि रक्षा मंत्रालय में फाइलों का अंबार लग गया है मगर वे चौबीस घंटे देने और एक भी छुट्टी न लेने के बावजूद उन्हें निपटा नहीं पा रहे हैं। पहली बार उन्हें एहसास हो रहा है कि इतने बड़े देश का रक्षामंत्री होना क्या होता है। उनकी इस बढ़ती व्यस्तता की वजह है सर्जिकल स्ट्राइक। एक सर्जिकल स्ट्राइक ने सब कुछ बदल दिया है। पहले वे एकदम खाली रहते थे, क्योंकि पीएमओ ही सब कुछ करता था। मगर अब नई ज़िम्मेदारी आन पड़ी है, उन्हें देश भर में जा-जाकर अभिनंदन करवाना पड़ रहा है। क्या करें राजनीति में हैं तो जनता की भावनाओं का ख्याल तो रखना पड़ता है न। और फिर ये तो राष्ट्र के प्रति उनका दायित्व भी है। अगर सेना ने कोई कमाल किया है तो रक्षामत्री अभिनंदन नहीं करवाएगा तो कौन करवाएगा और सरकार की महिमा का गान कैसे होगा? इसलिए वे बिना साँस लिए ही प्राणपण से जुटे हुए हैं।

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मैं जब एनकाउंटर करने पहुँचा तो उस समय भी अभिनंदन करने वालों की भीड़ लगी हुई थी। कोई मराठा साफा लेकर आया था तो कोई राजपूताना। किसी के हाथ में तलवार थी तो कोई गदा, धनुष बाण लेकर उनका तिलक करने के लिए तैयार खड़ा था। पर्रिकर एक जगह खड़े थे और लोग आ-आकर उनका अभिनंदन कर रहे थे। बहुत देर हो गई तो मैंने कहा-सर कुछ कीजिए। इस पर गोवा के गौड़ सारस्वत ब्राम्हण ने दिमाग़ लगाया और अपनी एक आदमकद तस्वीर मँगाकर वहाँ रखवा दी। अब लोग उसका अभिनंदन कर रहे थे और मैं दूसरे कमरे में उनका एनकाउंटर करने लगा।

पर्रिकर साहब, ये सब क्या है? सर्जिकल स्ट्राइक के बाद इस तरह से श्रेय लेना क्या ये अवांछित और अशोभनीय नहीं है?
जी, अवांछित भी है और अशोभनीय भी, मगर ज़रूरी भी है।

क्यों, क्यों ज़रूरी है? अरे सर्जिकल स्ट्राइक हो गई, आपने पाकिस्तान का हड़का दिया, अब चुपचाप अपना काम कीजिए?
आप भी कमाल करते हैं। अरे चुपचाप काम करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक थोड़ा करवाई थी। उसकी तो इजाज़त ही इसलिए दी गई थी कि हम सेना के बहाने अपनी बहादुरी का ढिंढोरा पीटें। इसके बिना हमारा काम ही नहीं होता।

काम तो हो गया है, उग्रवादियों के लाँच पैड सेना के जाँबाज़ कमांडों ने साफ़ कर दिए?
नहीं, मैं उस काम की बात नहीं कर रहा। वह तो सुरक्षा का काम है। मैं तो राजनीति के काम की बात कर रहा हूँ। आपको तो पता ही है कि चारों तरफ से हमारे प्रधानमंत्री और सरकार की आलोचना हो रही थी। उनकी नाकामियों के चर्चे हो रहे थे। लोग मज़ाक उड़ाने लगे थे 56 इंच का सीना, 56 इंच का सीना। इसलिए ज़रूरी हो गया था कि ऐसा कुछ किया जाए और हमने किया। इसलिए हमें तो इसका श्रेय लेना ही था, क्योंकि बिना श्रेय लिए हमारा काम नहीं होता।

लेकिन प्रधानमंत्री ने तो कहा है कि सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय सेना को मिलना चाहिए और कोई ऐसा काम न करे जिससे लगे कि हम इसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं?
देखिए, वे प्रधानमंत्री हैं। पद की मर्यादाओं से बँधे हुए हैं, इसलिए उन्हें बोलना पड़ता है। मगर हम जानते हैं कि असल में उनकी मंशा क्या है। इसलिए हम वही कर रहे हैं जो वे चाहते हैं। यही वजह है कि मैं दिन-रात अभिनंदन करवा रहा हूँ और यूपी में पार्टी पोस्टर-बैनर लगवा रही है सर्जिकल स्ट्राइक के। सब कुछ योजना के अनुसार ही हो रहा है।

इसका मतलब विपक्षी दलों का ये आरोप सही है कि आप सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं?
अब ये अपने मुँह से कैसे स्वीकार कर सकता हूँ। लेकिन आप लोग समझदार हैं और समझ सकते हैं कि सचाई क्या है। अगर मैं ये कहता हूँ कि सेना हनुमान है और उसे मोदी जी ने उसकी शक्ति का एहसास करवाया तो इसका संदेश बिल्कुल साफ है।

यानी काँग्रेस प्रवक्ता का ये कहना भी सही है कि आपको चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना चाहिए?
अगर हमारे जैसे नेता चुल्लू भर पानी में डूबकर मरने लगें तो हो गया। हमारे लिए तो समुद्र का पानी भी कम पड़ जाएगा, आप समझ सकते है क्यों इसलिए बताने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन काँग्रेस की प्रॉब्लम दूसरी है। उसे लग रहा है कि इससे बीजेपी मज़बूत हो रही है और इसका फ़ायदा उसे चुनाव में मिलेगा। ज़ाहिर है वह खिसियाई हुई है।


लेकिन ऑपरेशन जिंजर तो सचाई है न? सन् 2011 में सेना ने सर्जिकल ऑपरेशन किया था, इसलिए आपका ये दावा ग़लत साबित हो गया है कि आपकी सरकार ऐसा करने वाली पहली सरकार है?
देखिए उस समय उसने क्लेम नहीं किया तो अब क्यों छटपटा रहे हैं? उसे चुप बैठना चाहिए और हमसे सीखना चाहिए कि सेना का इस्तेमाल राजनीति में कैसे किया जाता है। हालाँकि सीखने से कुछ होगा नहीं क्योंकि अब तो वह सत्ता में आने वाली नहीं है। फिर भी क्या पता जैसे मोदी जी के भाग्य से छींका टूटा है, कभी राहुल की भी ल़ॉटरी लग जाए।

राहुल आएं या न आएँ, मगर एक ग़लत परंपरा तो पड़ गई न। अब हर पार्टी सेना का इस्तेमाल करने लगेगी?
हमें इससे फर्क नहीं पड़ता। अभी हमारी पारी है इसलिए हम खेलेंगे। जब दूसरे आएंगे तो देखा जाएगा कि क्या किया जाए। अभी तो हम अपना उद्देश्य पूरा करने में कामयाब हो गए हैं। देखिए कोई काला धन का मामला नहीं उठा रहा, कोई महंगाई-बेरोज़गारी की बात नहीं कर रहा। यहाँ तक कि दलित उत्पीड़न का विरोध करने वाले भी चुप बैठ गए हैं। पूरे देश में शांति कायम हो गई है।

लेकिन इतना बड़ा मुल्क है। यहाँ मुद्दे बदलते टाइम नहीं लगता। क्या पता फिर से दलित आंदोलन शुरू हो जाएं या लोग सरकार से आर्थिक समस्याओं पर सवाल करने लगें?
हो सकता है....मगर ज़्यादा हल्ला मचा तो फिर से सर्जिकल स्ट्राइक करवा देंगे। ये हमारे लिए कौन सी बड़ी बात है। सैनिकों का तनख्वाह किस बात की देते हैं, लड़ने की न? फिर भेज देंगे पीओके के अंदर किसी ऑपरेशन के बहाने।


ये बताइए कि क्या आपको लगता है कि सर्जिकल स्ट्राइक का यूपी के चुनाव में फ़ायदा मिलेगा?
बिल्कुल मिलेगा। जब सर्जिकल स्ट्राइक इस चीज़ को ध्यान में रखकर ही करवाई गई थी तो उसका फ़ायदा मिलना लाज़िमी है। हमने पूरा हिसाब-किताब लगा लिया है। आप तो देख ही रहे हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक ने राष्ट्रवाद की लहर पैदा कर दी है। इससे दलितों, अलपसंख्यकों और पिछड़ों के आधार पर हो रही गोलबंदी बेकार हो जाएगी। हिंदू वोट बैंक एकजुट हो जाएगा और सारे वोट बीजेपी की झोली में गिरेंगे। सच तो ये है कि हमने यूपी चुनाव का हमने सर्जिकल स्ट्राइक कर दिया है।

अभी पाँच महीने बाक़ी हैं चुनाव को और राजनीति में ये काफी लंबा समय माना जाता है। क्या पता तब तक सर्जिकल स्ट्राइक को लोग भूल ही जाएं?
हम लोगों को भूलने नहीं देंगे। हमने बहुत सारी योजनाएं बनाई हैं इसके लिए। अब जैसे ये अभिनंदन कार्यक्रम है वह इसी के लिए है। फिर हम सैनिकों और शहीदों के परिवारों को सम्मानित करने का कार्यक्रम चलाएँगे। फिर युद्ध का माहौल तो गरमाते ही रहेंगे। ज़रूरत पड़ी तो एकाध सर्जिकल स्ट्राइक और करवा देंगे।

मतलब सर्जिकल स्ट्राइक को आप चुनावी शस्त्र के रूप में इस्तेमाल करेंगे? आपको इसमें कुछ ग़लत नहीं लगता?
इश्क, जंग और सियासत में सब कुछ जाय़ज़ है। लेकिन मेरे कथन का ये मतलब न निकालिए कि हम सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे ही। ये तो हमारा आख़िरी शस्त्र है। हमारे पास हिंदुओं को एक करने के लिए और भी तरीक़े हैं। आप पिछले चुनावों में देख भी चुके हैं। इसलिए सर्जिकल स्ट्राइक को इतना तूल मत दीजिए। अगर मीडिया इतना हल्ला मचाएगा तो लोग जान जाएंगे और हमारे लिए मुश्किल हो जाएगा।

इस बीच बाहर शोर मचने लगा। रक्षामंत्री मुर्दाबाद की आवाज़ें आने लगीं। कुछ लोग ये नारे भी लगाने लगे कि सेना के नाम पर सियासत बंद करो, शहीदों के ख़ून से वोटों की होली मत खेलो। ये सब सुनकर पर्रिकर पहले तो सकपकाए, फिर गुस्से में भरकर बोले कि लगता है कि आम आदमी पार्टी या काँग्रेस के लोग आ गए हैं, अब आप निकलिए, मैं इनको ठीक करता हूँ। उनके इरादे मुझे ठीक नहीं लग रहे थे, मगर डर भी लग रहा था कि कहीं मेरी कोई बात उन्हें बुरी लगी और जासूसी या देशद्रोह के चार्ज में बंद करवा दिया तो बीवी-बच्चों का क्या होगा, इसलिए बगैर देशहित को भूलकर चुपचाप खिसक लिया।

हल्ला मचेगा तो फिर से सर्जिकल स्ट्राइक करवा देंगे-पर्रिकर

Written by-डॉ. मुकेश कुमार












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