नामवर और उदय के लिए अलग-अलग मानदंड ...
कभी-कभार/अशोक वाजपेयी
इन दिनों जसवंत सिंह की जिन्ना पर लिखी किताब चर्चा में है। उसके आधार पर उन्हें भाजपा से निकाला जा चुका है और उसमें सरदार पटेल की छवि को पहुँचाए गए तथाकथित आघात पर उसे गुजरात में ...
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कला के ओर-छोर और नई चिंताएं
कभी-कभार/अशोक वाजपेयी
इंडिया आर्ट समिट-2009 एक स्तर पर तो एक बड़ा कला मेला है,जिसमें देश-विदेश की कला-वीथिकाएं नई और थोड़ी पुरानी कला की कृतियां बहुत सुघर और आकर्षक ढंग से प्रदर्शित हैं और ख़बरों के ...
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अकथ कहानी प्रेम की
कभी-कभार/अशोक वाजपेयी
शायद पहली बार राष्ट्रीय संग्रहालय के सभागार में कबीर की बानी, उनकी या उनकी अबाध चली आ रही मौखिक परंपरा की, बानी गूँज रही थी। मालवा के अद्भुत लोकगायक प्रहलाद सिंह टिपाणियाँ कबीर ...
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अस्सी के राजेंद्र यादव
कभी-कभार/अशोक वाजपेयी
ऐसा कम होता है और हिंदी में तो और भी कम कि किसी लेखक की छवि अस्सी बरस की उमर होने पर एक कथाकार या सृजनकर्मी लेखक के रूप में न रहकर एक विवाद-प्रिय विचारक की हो जाए जैसा कि राजेंद...
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"हिंद स्वराज" और "गोरा" के सौ साल
कभी-कभार/ अशोक वाजपेयी
इधर हमारा ध्यान इस ओर तो गया है कि यह वर्ष गाँधीजी द्वारा लिखित एक क्रांतिकारी दस्तावेज़ "हिंद स्वराज" को सौ वर्ष हो गए,लेकिन इस ओर नहीं कि रवींद्रनाथ ठाकुर लिखित उपन्यास "गोरा"...
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आलोचक सुरेंद्र चौधरी का पुनर्जीवन
कभी कभार/ अशोक वाजपेयी
ठीक से याद नहीं कि कब और कहाँ आलोचक सुरेंद्र चौधरी से मुलाकात हुई थी। शायद नंदकिशोर नवल द्वारा आयोजित पटना युवक लेखक सम्मेलन में। शायद इलाहाबाद की किसी गोष्ठी में। उनकी लिखी आलो...
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