तीन कविताएं
-तादेऊष रूज़ेविच
-शब्दों से परे-
क्या कर रहे हो तुम
अँधेरे से बाहर आकर
क्यों नहीं जीना चाहते तुम
पूरी रोशनी में
मेरे भीतर
युद्ध खोलता है
दस लाख चकनाचूर चेहरों की एक पलक
ख़ून से सने
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फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह पर पेश हैं ...
अनुवाद-विजया सिंह
ताहा मुहम्मद अली फिलिस्तीनी साहित्य के महत्वपूर्ण व्यक्तित्व हैं। सफूरिया के गैलिली ग्राम में 1931 में जन्मे ताहा ने 1948 में हुए अरब-इस्राइल युध्द के दौरान पला...
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असमिया कविता-मेगन कछारी
ताली-
ताली गाँव की झोपड़ी में नहीं रहती,
मृदु तालियाँ हरे धान के खेतों में नहीं रहतीं,
तालियाँ ग्रामीणों के व्यस्त ओसारों में नहीं रहतीं.....
तालियाँ झरने में नहीं रहतीं
गाँव के ...
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आख़िरकार कब तक?
पाब्लो नेरूदा की कविताएं
पाब्लो नेरूदा चिली के लेखक और राजनीतिज्ञ थे। वे चिली की कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य थे और उन्होंने पार्टी में कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ भी सँभालीं। लेकिन उनकी असली पहचान तो उन...
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पाब्लो नेरूदा की कविताएं
आखिरकार कब तक?
आखिरकार कितना जी पाता है आदमी?
हज़ार दिन कि एक दिन?
सिर्फ़ एक सप्ताह या कि सदियों तक?
मरते वक़्त कितना समय लेता है आदमी?...
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पाब्लो नेरूदा की कविताएं
आखिरकार कब तक?
आखिरकार कितना जी पाता है आदमी?
हज़ार दिन कि एक दिन?
सिर्फ़ एक सप्ताह या कि सदियों तक?
मरते वक़्त कितना समय लेता है आदमी?...
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