बॉडी और प्लेज़र का संसार
-संजय द्विवेदी
सिर्फ चमकीले चेहरे, मेगा माल्स, बीयर बार, नाइट क्लब, पब और डिस्कोथेक। क्या भारत की नौजवानी यहीं पाई जाती है? क्या इन क्लबों में जवान हो रही पीढ़ी ही भारत के असली युवा का चेहरा है...
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अब ब्राम्हण भी अपना शौचालय खुद साफ़...
दिलीप मंडल
लेखक-पत्रकार दिलीप मंडल ने पिछले दिनों देशकाल में एक लेख लिखकर इस भ्रम को तोड़ने की कोशिश की थी कि ब्राम्हण श्रेष्ठ हैं और कुछ काम करने का हुनर उन्हीं के पास होता है। उनका लेख ब...
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चेन्या बनाता है बदलाव के चित्र
शिरीष खरे
‘‘मुंबई तेरी फुटपाथ पर/अनगिनत काम करते ये बच्चे/रात और दिन पसीना बहाते हुए/दौड़ते, भागते/ठहरते, हांफते/फिर भी हंसते हुए/मुसकुराते हुए/रंगीन गुब्बारे या प्लास्टिक की गाड़ी/फिल्मी अ...
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उन्हें हमारी तरक्की पच नहीं रही
-नीलेंदु सेन-
आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर नस्लवादी अत्याचार मुझे उस दृश्य की याद दिलाता है जब एक भारतीय बैरिस्टर को काला होने के चलते साउथ अफ्रीका के पिएत्र्मारिस्बर्ग नाम के स्टेशन पर सा...
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इनके अलगाव के लिए कौन ज़िम्मेदार है...
सामाजिक संवाददाता
मुसलमान झुंड में रहते हैं, अलग-थलग रहते हैं, वे मुख्यधारा में शामिल नहीं होना चाहते वगैरा वगैरा...इस तरह के ढेरों आरोप मुसलमानों पर लगाए जाते हैं। लेकिन जो मुसलमान तमाम सामाजिक-मान...
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नाबालिग लड़कियों के बच्चों में कुपोष...
शिरीष खरे
अट्ठारह साल से कम उम्र में मां बनने वाली लड़कियों से पैदा होने वाले बच्चों पर कुपोषण का खतरा सबसे ज्यादा मंडराता है। बीएमजे यानि बिट्रिश मेडीकल जनरल ने हाल में प्रकाशित अपने शोध ...
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ग्रीन लाइट के इंतजार में
शिरीष खरे
मुंबई। "मेरी जैसी कई औरतों को अपना शरीर बार-बार बेचना पड़ता है." एक औरत की जुबान से पहली बार ऐसा सुनकर मैं झिझक गया. सपना ने बेझिझक आगे कहा- ‘‘पेट के लिए करना पड़ता है. ईज्जत के...
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माइकल जैक्सन का हत्यारा कौन है!
-संगीत संवाददाता-
माइकल जैक्सन कौन था.......कैसे याद रखेगा उसे ज़माना... क्या है उसकी पहचान....?
क्या वह पश्चिमी पॉप संगीत का एक चमकता सितारा था......दुनिया का सर्वाधिक लोकप्रिय गायक........
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टूटे मंदिर-मस्जिद,पर न हुआ दंगा
अजय त्रिपाठी
छह दिसम्बर 1992....आज़ाद भारत के इतिहास का काला दिन...... अयोध्या में कारसेवकों ने उस बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था जिसे वे राम जन्मभूमि बताते थे और जो दो संप्रदायों के झगड़े म...
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पुलिस पर भारी बार बाला
-प्रवीण दुबे-
पिछले दिनों एक वारदात की खबर ने न केवल भोपाल बल्कि देश के कई हिंदी भाषी शहरों को सकते में डाल दिया था. वो था भोपाल की सड़क पर मुंबई से आई एक दंपत्ति को कार में लिफ्ट देकर पति की ...
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भोजपुरी को मान्यता दिलाने के लिए ते...
देशकाल संवाददाता
देश के महत्वपूर्ण भोजपुरी संगठनों ने मिलकर भोजपुरी भाषा को मान्यता दिलाने के आंदोलन को विश्व भर में फैलाने का आह्वान किया है और इसके लिए जल्दी ही बाकायदा एक एक्शन प्लान बनाने की...
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पोर्न के ख़िलाफ़ एक घोषणापत्र
जगदीश्वर चतुर्वेदी
पहले पोर्न को लेकर शर्म आती थी अब पोर्न निर्भय होकर हमारे घर में घुस आया है। पोर्न के कारोबार में बड़े कारपोरेट घराने शामिल हैं,वे बड़ी निर्लज्जता के साथ पोर्न का धडल्ले से ...
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भारतीय मुसलमान बनाम पाकिस्तानी मुसल...
कनिष्क
बीबीसी की वेब साइट पर पाकिस्तान से आए पत्रकार वुसतुल्लाह खान ने अपने भारत दौरे में देवबंद से जुडे अनुभव लिखे है .. इस लेख पर नजर डालें तो साफ हो जाएगा कि पाकिस्तान में बैठे मुसलमान...
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अश्लीलता पेंटिग्स में नहीं आपकी आँख...
-विशेष संवाददाता-
मशहूर चित्रकार मक़बूल फ़िदा हुसैन के कुछ चित्रों को लेकर पिछले एक-डेढ़ दशक से एक अभियान सा चलाया जा रहा है। ज़ाहिर है इस अभियान के पीछे वे हिंदुत्ववादी शक्तियाँ हैं जिनके दिल और दि...
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मरेंगी या मारेंगी ये बागी लड़कियाँ
चर्चा हमारा/ मैत्रेयी पुष्पा
जिन घटनाओं को हम दुर्घटना या कभी-कभी के हादसे मान लेते थे, अब रोज़मर्रा के वाकयात बन गए हैं। अख़बार में, टीवी पर दिन भर हमारे सामने कत्ल, ख़ून के दृश्य होते हैं। यह विचार आता है कि...
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धोखा हैं चुनाव?
अपनी राय दीजिए...
पिछले लगभग साठ साल से चुनाव हो रहे हैं,मगर चुनाव में होता क्या है...नक़ली मुद्दे, झूठे वादे,भ्रष्ट प्रत्याशी,जातीय और सांप्रदायिक आधार पर राजनीति,धन और बाहुबल के इस्तेमाल से वोट हा...
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पॉपुलर कल्चर को समझने का नया नज़रिय...
जगदीश्वर चतुर्वेदी
हमारे समाज में जिस तरह पापुलर कल्चर के प्रति अनालोचनात्मक प्रचार चल रहा है और प्रगतिशीलों के द्वारा जिस तरह पापुलर कल्चर की उपेक्षा की जा रही है वह चिन्ता की चीज है। पापुलर कल्च...
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बच्चे खड़े बाजार में
शिरीष खरे
यह दृश्य बार-बार घटने से अब साधारण लगता है- मुंबई के मशहूर लियोपोर्ड की संगीतभरी रातों के सामने भीख मांगते 10 से 12 साल के 12 से 15 बच्चे खड़े मिलते हैं। ये उन शोषित बच्चों के समूह ...
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कट्टरपंथियों को काबू में किया जाए
-सामाजिक संवाददाता-
कट्टरपंथी समाज और राजनीति पर इस क़दर हावी हो गए हैं कि छोटी-छोटी बातों पर और कई बार तो बिना बात के ही बखेड़ा कर देते हैं मगर कोई उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाता। उन्होंने समाज में भय का ...
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आर्थिक विकास के बीच बढ़ती लैंगिक-असम...
शिरीष खरे
भारत सरकार कहती है कि पहली बार देश में प्रति व्यक्ति आय 3000 रुपए/महीने को पार कर रही है। उधर इस साल विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के लैंगिक-समानता पर हुए मूल्यांकन में 134 देशो...
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जब तारे ज़मीं पर होते हैं....!
-नीलेंदु सेन-
ये कोई ख़ास पुराना इतिहास नहीं है, लेकिन क्रिकेट में बीता हुआ चौबीस घंटा भी पुराना इतिहास बन जाता है. मुश्किल तो ये है कि हमारी भारतीय टीम को ये बात समझ में ही नहीं आती. न जाने भार...
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परिवर्तन के लिए उठे चौसठ हाथ
शिरीष खरे
महाराष्ट्र के जिला बीड़ के मुख्यालय से कोई 110 किलोमीटर दूर है कनाडी गांव. वहां जाने वाली उबड़-खाबड़ सड़क आधे रास्ते पर साथ छोड़ देती है. फिर लोग अपनी सहूलियत से पगडंडियां बनाते चलते...
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मुंबई से मेलबर्न तक नस्लवाद
-सामाजिक संवाददाता-
आस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों और काम करने वालों के साथ मारपीट आज भले ही भारतीय समाज को उत्तेजित कर रही हो मगर ये कोई बहुत ज़्यादा हैरत पैदा करने वाली घटना नहीं है। अश्वेत, एशियाई ...
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चर्चा हमारा/ ख़ूबसूरत लड़कियाँ
-मैत्रेयी पुष्पा-
अख़बार के पृष्ठ पर, टेलीविज़न के परदे पर तीन तस्वीरें प्रमुखता से उभर कर आ रही हैं-तीनों ही युवा लड़कियाँ हैं। यों तो युवतियों का आना-जाना मीडिया के लिए रोज़मर्रा की पेशकश है, ड...
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ज़रा देखिए-लड़कियों कहाँ गायब की जा...
शिरीष खरे
2001 की जनगणना में हर समुदाय से जुड़ी हजारों संख्याओं का गुणा-भाग मौजूद है। नहीं मौजूद है तो इस सवाल का जवाब कि ऐसी संख्याओं के बीच से एक बड़ी संख्या में लड़कियां कहां गायब हो रही ...
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जूते की जय हो...?
अपनी राय दीजिए
जूता चाहे बुश पर चला हो या फिर चिदंबरम पर,उसने असर ज़रूर दिखाया है। सदी के सबसे बड़े हत्यारे बुश की दुनिया भर में बेइज़्जती हुई तो चिदंबरम पर चले जूते ने दागी नेताओं के टिकट काटने ...
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