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अंतर्संवाद/ विज्ञापन में पप्पू
-उदय सहाय-
पप्पू वोट नहीं देता,दिल्ली चुनाव आयोग यह मानता है। आयोग की नसीहत है पप्पू मत बनो। आप मीडिया के विद्यार्थी हों या गुरू,कुल मिलाकर छह सहज प्रश्न आपके दिमाग में कौंध सकते हैं। मसलन–कौ...
फिर चला जूता...
-ब्रजेश राजपूत-
दैनिक जागरण के पत्रकार जनरेल सिंह ने पत्रकार वार्ता के दौरान गृहमंत्री पर जूता फेंक कर वह कर दिया जो अब तक कभी नहीं हुआ था. देश का पत्रकारिता जगत इस घटना के बाद सन्न है. जनरेल सिंह...
कैसे चमकेगा दूरदर्शन का कल ?
-वर्तिका नन्दा-

सौ दिन के एजेंडे में सूचना और प्रसारण मंत्रालय भी सपनों को पूरा करने में लग गया है। इसमें से एक दूरदर्शन की ढील...

कैसे चमकेगा दूरदर्शन का वर्तमान
-वर्तिका नन्दा-

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चुनावी विज्ञापनों के मौसम में
-उदय सहाय-
कहा जा रहा है कि विश्व भर के चुनावी कैंपेन्स में दो बहुत मशहूर हुए। पहला, टोनी ब्लेयर का ‘लेफ्ट डज नाट वर्क’ वाला एड कैंपेन और दूसरा, ओबामा का ‘यस वी कैन’ ‘चेंज हैज कम टू अमेरिका’ ...
अंतर्संवाद/ संवाद खर्च में कंजूसी
-उदय सहाय-
अक्तूबर 2010 में होने वाली कामनवेल्थ गेम्स की तैयारियों को लेकर पिछले कुछ समय से मीडिया अटकलें लगा रही है। उसके दिमाग में मुख्यत: पांच आशंकाएं गोते लेते दिखती हैं: पहली कि खेल की त...
चैनलों की संख्या तो बढ़ी, मगर साख ज...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

भारतीय समाचार चैनलों का नव्य -उदारतावादी दौर में धंधा चोखा रहा। आंकड़े बताते हैं कि विगत 10 सालों में चैनलों की तादाद में तेजी से इजाफा हुआ है। अभी 80 न्यूज चैनल हैं जिनकी संख्य...

क्या थे, क्या हो गए, क्या होंगे अभी...
-मुकेश कुमार-
“मुझसे ऐसे सवाल न करें जो आप मार्केट में बेचना चाहते हैं”- कार में बैठे एक नेता द्वारा माइक थामे टीवी चैनलों के रिपोर्टरों से कहा गया ये वाक्य गौर करने लायक है। नेताज...
जूते पर गोलमेज सम्मेलन
-देशकाल संवाददाता-
गृहमंत्री पी चिदंबरम पर चले जनरैल सिंह के जूते ने मीडिया में नयी बहस को गरमा दिया है. भोपाल में पत्रकारों के संगठन फ्रेंड्स आफ मीडिया ने इस मसले पर गोलमेज चर्चा में पत्रकारिता और ज...
 
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