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आलोचना में लोकतंत्र का मतलब
जगदीश्वर चतुर्वेदी

'उपलब्ध' आलोचना का कच्चा माल है।'अनुपलब्ध' आलोचना का मौलिक तत्व है। आलोचना में जनतंत्र का विकास तब होता है जब आलोचना 'अनुपलब्ध' की तरफ ध्यान देती है। परिवर्तनकामी विच...

ज्ञान और सत्य से भागता हिन्दी का बु...
सुधा सिंह

मार्शल मैकलुहान ने लिखा है कि आधुनिक युग में पुस्तकें यश और अमरत्व प्राप्त करने का जरिया हैं। ऐसा उन्होंने पुस्तक की ताक़त को देखते हुए लिखा था। लेकिन आधुनिक पल्लवग्राही बुद्धीज...

शि‍वकुमार मि‍श्र का 80 वें वर्ष में...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

हिंदी में जन्‍मदि‍न मनाने की परंपरा का दो ही लेखक नि‍र्वाह,नामवर और राजेन्‍द्र यादव। वैसे बाकी लेखक भी जन्‍मदि‍न मनाते तो अच्‍छा होता। ये दोनों हिंदी के सैलीबरेटी लेखक हैं। लेकि...

हंस की गोष्ठी में फट पड़े नामवरजी
साहित्य संवाददाता
ऐसे समय में जब राजनीति में राहुल गाँधी और युवा नेतृत्व का चर्चा चल रहा हो तो हंस के सालाना सेमिनार के लिए युवा रचनाशीलता को चुनने के पीछे आख़िर क्या मक़सद हो सकता है,....क्या राजें...
नामवरजी को फिनामिना के रूप में देखन...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

वह साहि‍त्‍य में जि‍तना चर्चित है, नेट पाठकों में भी उतना ही चर्चित है। वह व्‍यक्‍ति नहीं फि‍नोमि‍ना है। वह आलोचक है,शि‍क्षक है,श्रेष्‍ठतम वक्‍ता है,हि‍न्‍दी का प्रतीक पुरूष है।...

राजेंद्र यादव का अस्सीवाँ जन्मदिन
देशकाल फोटोफीचर

कथाकार और हंस के संपादक राजेंद्र यादव का जन्मदिन हर साल धूमधाम से मनता है। ये धूम-धड़ाका कुछ अलग ढंग का भी होता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। कहने को तो उनके जन्मदिन पर उनकी पुत...

भाषा से खिलवाड़ तो मत कीजिए!
राजेश त्रिपाठी

इन दिनों कुछ तो हिंदी में बुरी तरह से घुसपैठ कर रही अंग्रेजियत और कुछ भाषा के अज्ञान के चलते बड़ा अनर्थ हो रहा है। हमारी वह भाषा जो एक तरह से हमारी मां है, हमारी अभिव्यक्ति का ज...

आलोक श्रीवास्तव को दुष्यंत कुमार पु...
-कुमार संभव-

मध्यप्रदेशअधिक जानें

लेखकों का सम्मान और सरकारी टुच्चापन
अजित राय,लंदन से

इस समय भारत से बाहर हिन्दी भाषा और साहित्य में जो कुछ लिखा पढ़ा जा रहा है उसका सीधा सम्बन्ध अमरीका और ब्रिटेन से है। हिन्दी की नई वैश्विक पीढ़ी का मुख्य आकर्षण अमरीका और ब्रिटेन ह...

आलोक, पवन करण को ऋतुराज सम्मान
देशकाल संवाददाता

नई दिल्ली की साहित्यिक संस्था "परंपरा" ने इस बार प्रतिष्ठित 'ऋतुराज सम्मान-2009' के लिए मध्यप्रदेश के युवा ग़ज़लकार आलोक श्रीवास्तव को चुना है. आलोक को यह सम्मान उनके चर्चित ग़ज...

धुनों की अविस्मरणीय यात्रा
मुकेश कुमार

अभी ज़्यादा वक्त नहीं गुज़रा है जब रेडियो पर फिल्मी गानों की उद्घोषणा के समय गाने के बोल के साथ-साथ गायक-गायिका और संगीतकार का नाम भी ज़रूर बताया जाता था। फिल्म संगीत के चाहने व...

जिन्होंने हमारी “आदमी” से पहचान करा...
-अशोक वाजपेयी-

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हाशिए पर पड़े लोगों पर गंभीर पुस्तक ...
डॉ. पल्लव
हाशिए पर पड़े लोगों का उन्नयन किसी भी सजग नागरिक के लिए चिंता का विषय है। समाजशास्त्री के लिए यह चुनौती है कि वह इन लोगों के लिए बेहतर का मार्ग समाज और व्यवस्था को सुझाए। सुप्रसिद्ध...
अशोकजी तो अफसर हैं....
-राजेंद्र यादव-
सुपरिचित कथाकार और साहित्यक पत्रिका हंस के संपादक राजेंद्र यादव का कहना है कि अशोक वाजपेयी अफसर हैं और उन्हें हरेक के बारे में ये कहने का अधिकार है कि वह निकम्मा, मूर्ख और बेकार व्...
थाली भर धूप छोड़ गए हरीश भदानी
जलेस की श्रद्धांजलि

हिंदी और राजस्थानी के सुप्रसिध्द कवि, गीतकार और संपादक हरीश भादानी नहीं रहे। 2 अक्तूबर की तड़के सुबह 4 बजे बीकानेर में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे कुछ अर्से से बीमार चल रहे थे। उन...

ढलान पर कौन-नामवर या अशोक?
-विशेष संवाददाता-
सुपरिचित कवि एवं संस्कृतिकर्मी अशोक वाजपेयी ने एक बार फिर भारतीय साहित्य के शिखर पुरूष कहे जाने वाले डा. नामवर सिंह पर हल्ला बोला है। उन्होंने न केवल हल्ला बोला है बल्कि नामवरजी के...
हिन्दी न होती तो हिन्दोस्तां भी नही...
श्रीराम तिवारी

आज टेलीविजन, कम्प्यूटर तथा ब्रॉडबैंड इत्यादि के अत्यधिक प्रचलन से ज्ञान आधारित सूचना तंत्र सहित संपूर्ण वैश्विक उत्पादनों का भूमंडलीकरण हो चुका है। नए-नए ब्लॉगों और वेबसाइट्स पर...

 
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