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(साहित्य)हिंदी >> व्यंग्य
 
 
प्रकाशित संपादकों के लिए एक अप्रकाश...
-संजय ग्रोवर-
पिछले दिनों कुछ पत्र-पत्रिकाओं और वेबज़ीनों पर निर्देश जारी हुए हैं कि लेखकगण अपनी अप्रकाशित और मौलिक रचनाएं ही भेजें। मानाकि मौलिकता एक विवादास्पद और ग़ैरज़रुरी मसला है मगर संपादकों ...
साधौ जग बौराना
कायर कौम अमेरिका, फिर काहे ऐंठे मूँ...
अमेरिका के अटार्नी जनरल एरिक होल्डर का कहना है कि अमेरिकी लोग कायर होते हैं। उनके मुताबिक अमेरिकी कायर इसलिए होते हैं क्योंकि वे नस्ली मामलों पर बातचीत करने से घबराते हैं, कतराते ह...
व्यंग्य/ वह जो आदमी है न
हरिशंकर परसाई


निंदा में विटामिन और प्रोटीन होते हैं. निंदा खून साफ करती है, पाचन-क्रिया ठीक करती है, बल और स्फूर्ति देती है. निंदा से मांसपेशियां पुष्ट होती हैं. निंदा पायरिया का तो शर्ति...

व्यंग्य/ साधौ जग बौराना
कल्याणकारी मिशन पर कल्याण सिंह
कल्याण सिहं एक बार फिर कल्याण करने निकल पड़े हैं...इस बार मसाजवादी पार्टी और उनके कर्णधारों का। दरअसल, वे निकले नहीं हैं, उन्हें मसाजवादी नेता अमर सिंह ने निकाला है। वैसे वे भी निक...
हिंदी समय में विचारों की कमी
-देशकाल-
हिंदी में विचार-विमर्श कितना सुस्त और पिछड़ा हुआ है इसका अंदाज़ा आप किसी सेमिनार, परिचर्चा में जाकर लगा सकते हैं। चिंतन और दर्शन के स्तर पर नवीनता की उम्मीद करना रेगिस्तान में पानी...
 
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