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(साहित्य)हिंदी >> विशेष रिपोर्ट
 
 
साहित्य में आशावादी संकेत-स्वयं प्र...
गणेशलाल मीणा, उदयपुर से

हिन्दी की रचनात्मकता अपने लिए बरसों बाद एक भिन्न शिल्प की तलाश कर रही है। जो संस्मरण होना चाहिए था वह संस्मरण नहीं है, समीक्षा भी है, जो कहानी होनी चाहिए वह बीज उपन्यास भी है, ज...

आंदोलन एवं विमर्श में घनिष्ठ संबंध ...
पी एन. राजेशकुमार
केरल में समकालीन हिन्दी लेखकों की देन विषय पर त्रिदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
कैथोलिकेट कालेज, पत्तनम्तिट्टा (केरल) के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में दिनांक 27-29 अक्टूबर को ‘समकाल...
"जिस लाहौर नहीं वेख्या-राजनीतिक नाट...
लंदन से दीप्ति कुमार

"जिस लाहौर नहीं वेख्या…. नाटक…. राजनीतिक नाटक नहीं है। हां यह संभव है कि विभाजन की पृष्ठभूमि होने के कारण राजनीति की अण्डरटोन सुनाई दे जाती हों। किन्तु कहीं भी राजनीति इस नाटक क...

' ई लेखक " असली वारिस हैं भारतेन्दु...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

'ई लेखकों ' और 'हिन्दी लेखकों ' में एक दूसरे के प्रति बेगाना भाव है। हमारे यहां कलम और कम्प्यूटर के बीच महा-अंतराल है। आज अधिकांश 'हिन्दी लेखक' 'ई लेखक' को जानते तक नहीं हैं। यह...

जातिवाद और बुद्घिजीवी
राजेन्द्र यादव

हुआ यूं कि मेरे अस्सी वर्ष पूरे होने पर अशोक वाजपेयी ने रजा फाउंडेशन की ओर से मेरा सम्मान किया. वहां उदय प्रकाश ने पिछड़ी जातियों के उत्थान की बात करते हुए कुछ ऐसी बातें कहीं जो...

बेकार का विवाद
राजेन्द्र यादव
जाने-माने कथाकार और साहित्यिक पत्रिका हंस के संपादक राजेंद्र यादव ने भगवानदास मोरवाल के विवादास्पद उपन्यास“रेत”को लेकर उठाए जा रहे विवाद पर चिंता ज़ाहिर की है और कहा है कि इस विवाद...
अब राजेंद्र यादव ने साहित्य में देख...
साहित्य संवाददाता

प्रख्यात कथाकार और साहित्यिक पत्रिका “हंस” के संपादक राजेंद्र यादव ने हिंदी साहित्य में “जातिवादी विमर्श” का एटम बम पटका है। उन्होंने कहा है कि ब्राम्हणों के पास अमूर्त चीज़ों क...

मुझे खेद है,मैं अपने स्टैंड को रिवा...
वरिष्ठ लेखक राजेंद्र यादव से बातचीत

पहले प्रभाष जोशी ने ब्राम्हणों की खूबियाँ बताईं और फिर एक दूसरे अंदाज़ में राजेंद्र यादव ने भी अपने अस्सीवें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में ऐसा ही कुछ कह दिया। ज़ाहिर है कि हंग...

विवाद
"रेत" पर बवाल और लेखकों की चुप्पी
फिर एक लेखक ख़तरे में है और लेखक बिरादरी सोई हुई है। निशाने पर सुपरिचित उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल हैं और उनके ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ रखी है उत्तरप्रदेश की गिहार जनजाति की महिलाओं ने। ...
आज का युवा कहाँ है "नया पथ" के युवा...
जगदीश्वर चतुर्वेदी

जनवादी लेखक संघ कमाल का संगठन है यह संगठन सामयि‍क संसार के साथ संवाद कम से कम करता है। वि‍गत छह महीनों में इस संगठन की साहि‍त्‍यि‍क पत्रि‍का 'नयापथ' के दो 'युवा अंक' आए हैं। इन ...

अभी मरा नहीं है लेखक.......!
-उदयप्रकाश-
हम ऐसे समय में रह रहे हैं जब लेखक की मृत्यु की घोषणा बहुत से विद्वानों द्वारा पहले ही की जा चुकी है। इतिहास के अंत के साथ ही लेखक की मृत्यु की बात भी इतनी बार कही गई है कि ये अब ए...
 
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