पेलवान हम थे मगर बेटई ने धूल चटा दी-मुलायम

नेताजी ने अपने सियासी जीवन में बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखे थे मगर ये कभी नहीं सोचा था कि ऐसे दिन भी देखने पड़ेंगे कि पूरी पार्टी देखते-देख...
Read More

मुझसे उम्मीद न रखो, मैं खुद नाउम्मीद हूँ-न्यू ईयर

तीन दिन से इसी उधेड़बुन में लगा हुआ था कि अबकी बार किसका एनकाउंटर करूँ। हर बार वही गिने-चुने चेहरे और घिसी-पिटी उनकी बातें सामने आ जाती ...
Read More